sell books sell books
Sign In

Search News Articles

India Become Fake Publication Market

Arshad Naseem, Published On:19-Jul-2018

भारत अब एक ऐसा देश बन चुका हैं जहां जर्नल्स और पत्रिकाएं व्यवसाय के लिए पब्लिश की जाती हैं। इंडियन एक्सप्रेस की जाँच के मुताबिक करीब 300 से ज्यादा प्रकाशन असामन्य जर्नल्स के रूप में पब्लिश हो रही हैं, जो शिक्षा की गुणवत्ता को कहीं न कहीं ख़राब करती जा रही हैं। यह पत्रिकाएं अपने आप को अंतरराष्ट्रीय होने के साथ साथ खुद को सामान्य बताती हैं। जबकि जाँच के मुताबिक यह पब्लिकेशन सिर्फ पैसो के लिए Publication करती हैं। ऐसा ही उदहारण है हैदराबाद में OMICS नाम की कंपनी, जो करीब700 से ज्यादा पब्लिकेशन करती हैं और इनमे से ज्यादा पब्लिकेशन ऑनलाइन मौजूद हैं जो बिना किसी एक्सपर्ट या संपादक के जाँच बेगैर ही पब्लिश्ड हैं। वास्तव में, ओएमआईसीएस कंपनी धोखाधड़ी के मामले में अमेरिका में संघीय व्यापार आयोग यानि FTC द्वारा कानूनी कार्रवाई का सामना कर रही है।

10 महीने पहले सुभाष चंद्र लोखटिया जो सीनियर साइंटिस्ट है बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में, उनोहने UGC द्वारा लगभग 32,000 पत्रिकाओं को एप्रूव्ड करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा पब्लिकेशन को रेकमेंड करने की एक समिति से इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि सूची में कई सारी फर्जी और संदिग्ध पत्रिकाएं हैं। इसी के चलते 2 मई को, यूजीसी ने सूची से 4,305 पत्रिकाओं को हटा दिया क्यूंकि उनकी वेबसाइट और पब्लिकेशन में फर्जी और संदिग्ध मटेरियल थे। प्रकाशन कंपनियों में एम्स जैसे हॉस्पिटल के डॉक्टर के नाम राइटर के तौर पर दर्ज हैं तो साथ ही देश के बड़े विश्वविद्यालय आईआईएम के अध्यापकों के नाम भी जुड़े हैं।

आपको बता दे कि इसी के चलते पिछले महीने, द इंडियन एक्सप्रेस ने ऐसी सैकड़ों वेबसाइटों का दौरा किया साथ ही मालिकों, विशेषज्ञों और संपादकों के इंटरव्यू किये और इस जाँच से पता चला कि 700 पत्रिकाओं के पीछे सिर्फ एक कंपनी हैं। साथ ही एक वेबसाइट ने 96% की छूट बताई और दूसरे ने तो शुल्क की लिस्ट भी देने से इंकार कर दिया।

इनमें से अधिकतर पब्लिकेशन Medicine, Engineering और Management की हैं, जैसे- The Journal of Religious Studies, Buddhism and Living from the Journal of Aging Research और The European Journal of Medicinal Plants. अगर कंपनी की बात करें तो OMICS, IOSR और Science Domain इंटरनेशनल कंपनी यानि ICIJ द्वारा 175,000 प्रकाशनों पर CONCLUSION साझा करने के लिए ऑनलाइन मंच प्रदान किया गया हैं। ये तीन ऐसे प्रमुख खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्हें इंडियन एक्सप्रेस ने ट्रैक किया।

OMICS Number of journals: 785 Topics: Medicine, Pharmaceuticals, Engineering, Technology, Management Charge: Rs 10,132 -123,692 आंध्र विश्वविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी श्रीनिबाबू गदेला द्वारा चलाई जा रही OMICS कंपनी भारत में हिंसक पत्रिकाओं के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है। आप बता दे कि इन पब्लिकेशन के लिए कई अकादमिक और पेशेवरों ने कहा कि उन्हें समीक्षा करने के लिए कभी भी कोई Manuscript नहीं मिली है लेकिन फिर भी इतनी पब्लिकेशन बिना एक्सपर्ट और एडिटिंग के पब्लिश हुई। अबतक कंपनी ने 1 मिलियन से अधिक लेख प्रकाशित किया है। और जब इसी सिचुएशन पर श्रीनिबाबू गदेला से सवाल हुए तो उनका कहना है कि एफटीसी चार्ज पूरी तरह से गलत है और हमारे प्रकाशन सही हैं।

Austin Number of journals: 202 Topics: Medicine, Pharmacology Charge- Rs 122, 400 Austin कंपनी जिसने एक दर्जन ई-किताबें भी प्रकाशित की हैं, महेंद्र रेड्डी चिरा और शिव पार्वती चिरारा द्वारा यह कंपनी चलाई जा रही है। इसकी वेबसाइटें अमेरिका में न्यू जर्सी से मुंबई में अंधेरी-कुर्ला तक कई संस्थानों तक दिखती हैं। संपादकों के Contact Details और संपादकीय टीम के सदस्य, ऑस्टिन वेबसाइटों पर उपलब्ध ही नहीं हैं। कंपनी ने अबतक 7,000 से अधिक लेख प्रकाशित करने का दावा किया है।

इसी तरह और भी पब्लिकेशन कंपनी है जो अलग अलग सब्जेक्ट पर अपने पब्लिकेशन अलग अलग कॉस्ट रेट पर पब्लिश करती हैं। जैसे -

Science Domain No. of journals: 111 Topics: Science, Technology, Medicine

IAEME No. of journals: 126 Topics: Engineering, Management

IJRDO Journals No. of journals: 43 Subjects: Engineering, Medicine, Science, Technology, Management, Health Science, Environment

IOSR Journals No. of journals: 24 Subjects: Engineering, Management, Pharmacy, Applied Science, Mathematics

IASTEM No. of journals: 10 Topics: Science, Technology, Engineering, Management

ऐसी लगभग 300 से ज्यादा पब्लिकेशन जो शिक्षा के स्तर को गलत दिशा में ले जा रही है बल्कि सिर्फ और सिर्फ पूंजी बनाने का काम कर रही हैं। ऐसी स्थिति में UGC या सम्पादिक कम्युनिटी को कार्यवाही करनी होगी जिसमे पब्लिकेशन की जाँच हो और भारत में चल रहे पब्लिकेशन की कालाबाज़ारी ख़त्म हो।






Back to top